Friday, October 12, 2007

प्रकृति से रूबरू अनुराधा


कैनवस पर सजे विशाल पहाड़ और नदियां आपको कल्पना के खूबसूरत लैंडस्केप में पहुंचा देते हैं। मानों आप खुद प्रकृति के साथ सीधे रूबरू हो रहे हों। यह नजारा दिखा रूसी विज्ञान एवं कला केंद्र में चल रही अनुराधा रिषि की पेटिंग प्रदर्शनी में। उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य को पूरी संजीवता के साथ कैनवस पर उतारा है। पहाड़ों के बीच तेज बहाव के साथ बहती नदी, हवा के झोंकों के साथ झूलते पेड़ और आसमान में दौड़ते बादलों को देखकर लगता है मानो वे किसी अनंत यात्रा पर दौडे़ जा रहे हों।
जम्मू में रहने वाली अनुराधा की पेटिंग में उनके गृह प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती साफ झलकती है। लेकिन इस प्राकृतिक सौंदर्य में कहीं कहीं कलाकार के मन में छाई उदासी को उजागर करती है। दूसरी तरफ हवा को झोंकों के साथ झूलते पेड़ मन में उमड़ रहे तूफान को दर्शाते हैं। इसके अलावा अनुराधा ने घोड़ों और अर्द्धनग्न स्त्रियों को भी कैनवस पर बड़ी संजीदगी के साथ उतारा है। उनकी पेंटिंग में दर्शाई गई अर्द्धनग्न स्त्रियों और प्रकृति के बीच एक अजीब सा जुड़ाव पाते हैं। अनुराधा की यही विशेषता है।
यह प्रदर्शनी 25 सितंबर को रूसी पेंटर कांस्टेंटिव वेसीलाईव के 65वें और संसार चंद्र बारू के 105वें जन्म दिवस के मौके पर आयोजित की गई। अनुराधा पहाड़ी लघु चित्र शैली के गुरु संसार चंद्र बारू की बेटी हैं। वह गर्व से कहती हैं कि कला मुझे विरासत में मिली है।
चेतन त्रिवेदी

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